فرهنگ‌نویسی فارسی در قلمروی زبان فارسی

نوع مقاله: مقاله پژوهشی

نویسنده

استادیار

چکیده

در این نوشته، «تاریخ تحولات فرهنگ‌نویسی فارسی» در قلمروی زبان فارسی بررسی می‌شود. با مقایسۀ قدیمی‌ترین فرهنگ‌های فارسی با فرهنگ‌هایی که در سدۀ بیستم نوشته شده‌اند، می‌توان کل تاریخ فرهنگ‌نویسی فارسی را به دو دورۀ «سنتی» و «علمی» تقسیم کرد. منظور از فرهنگ‌نویسی سنتی دوره‌ای از فرهنگ‌نویسی فارسی است که از قرن چهارم و پنجم هجری آغاز شد و تا پایان قرن سیزدهم هجری ادامه یافت. فرهنگ‌های این دوره هم ازنظر قالب و هم ازنظر محتوا معمولاً تکرار فرهنگ‌های قبلی بوده‌اند. در فرهنگ‌نویسی علمی، نوشتن کتاب لغت یا فرهنگ جدید تنها زمانی قابل‌ توجیه است که با آن بتوان تحولی ایجاد کرد. با توجه به این نکات فرهنگ‌نویسی امروزه ازنظر زمانی به دو گروه فرهنگ‌های تاریخی و فرهنگ‌های معاصر تقسیم می‌شوند که ناظر به پیدایش زبان‌شناسی تاریخی و زبان‌شناسی هم‌زمانی است و ازنظر مخاطب‌شناسی به سه دستۀ فرهنگ‌های عمومی، فرهنگ‌های تخصصی یا موضوعی و فرهنگ‌های جامع تقسیم می‌شوند. دورۀ تحول و تجدد فرهنگ‌نویسی در ایران از زمان قاجاریه آغاز شده و تا به امروز ادامه یافته است. در سال ۱۳۰۵ش، در شبه‌قاره کتاب لغتی باعنوان فرهنگ نظام نگاشته شد که مؤلفش آن را نخستین فرهنگ جامع زبان فارسی خوانده است. یک دهه بعد از اولین چاپ این فرهنگ، فرهنگستان زبان تشکیل شد که دورۀ اول و دوم آن به «فرهنگستان اول» و «فرهنگستان دوم» شهرت یافته است. «فرهنگستان سوم» نیز در دهۀ شصت تشکیل گردید. فرهنگ ناظم‌الاطبا، فرهنگ دوزبانۀ حییم، لغت‌نامۀ دهخدا، فرهنگ فارسی معین، فرهنگ تاریخی زبان فارسی، فرهنگ الفبایی قیاسی زبان فارسی فرهنگ دوزبانۀ نشر نو و هزاره مهم‌ترین فرهنگ‌هایی هستند که پس از تأسیس فرهنگستان ایران تألیف شده‌اند. بررسی روند تحول فرهنگ‌نویسی در ایران نشان‌دهندۀ آن است که فرهنگ‌نویسی فارسی در آینده به‌سوی علمی شدن و تخصصی شدن گام برخواهد داشت.

کلیدواژه‌ها


عنوان مقاله [English]

Фарњангнависии форсї дар ќаламрави забони форсї

نویسنده [English]

  • Муртазо Разморо
چکیده [English]

Дар ин навишта «таърихи тањаввулоти фарњангнависии форсї»  дар ќаламрави забони форсї баррасї мешавад. Бо муќоисаи ќадимитарин фарњангњои форсї бо фарњангњое, ки дар садаи бистум навишта шудаанд, метавон кулли таърихи фарњангнависии форсиро ба ду давраи «суннатї»  ва «илмї»  таќсим кард. Манзур аз фарњангнависии суннатї даврае аз фарњангнависи форсї аст, ки аз ќарни чањоруму панљуми њиљрї оѓоз шуд ва то поёни ќарни сездањуми њиљрї идома ёфт. Фарњангњои ин давра њам аз назари ќолаб ва њам аз назари муњтаво маъмулан такрори фарњангњои ќаблї будаанд. Дар фарњангнависии илмї, навиштани китоби луѓат ё фарњанги љадид танњо замоне ќобили таваљљуњ аст, ки бо он битавон тањаввуле эљод кард. Бо таваљљуњ ба ин нукот фарњангнависии имрўза аз назари замонї ба ду гурўњ-фарњангњои таърихї ва фарњангњои муосир таќсим мешаванд, ки нозир ба пайдоиши забоншиносии таърихї ва забоншиносии њамзамонест ва аз назари мухотабшиносї ба се даста- фарњангњои умумї, фарњангњои тахассуси ё мавзўї ва фарњангњои љомеъ таќсим мешаванд. Давраи тањаввул ва таљаддуди фарњангнависї дар Эрон аз замони Ќољория оѓоз шудаву то ба имрўз идома ёфтааст. Дар соли  1305 ш. дар Шибњи Қора китоби луѓате бо унвони «Фарњанги Низом» нигошта шуд, ки муаллифаш онро нахустин фарњанги љомеъи забони форсї хондааст. Як дања баъд аз аввалин чопи ин фарњанг Фарњангистони забон ташкил шуд, ки давраи аввал ва дувуми он ба «Фарњангистони аввал»  ва «Фарњангистони дувум»  шуњрат ёфтааст. «Фарњангистон севум»  низ дар дињаи шаст ташкил гардид. «Фарњанги Нозиму-л-атиббо», «Фарњанги дузабонаи Њайим», «Луѓатномаи Дењхудо», «Фарњанги форсии Муин», «Фарњанги таърихии забони форсї», «Фарњанги алифбої-ќиёсии забони форсї», «Фарњанги дузабонаи нашри нав ва њазора» муњимтарин фарњангњое њастанд, ки пас аз таъсиси Фарњангистони Эрон таълиф шудаанд. Баррасии раванди тањаввули фарњангнависї дар Эрон нишондињандаи он аст, ки фарњангнависии форсӣ дар  оянда ба сўи илмї шудан ва тахассусї шудан гом бархоњад дошт.

کلیدواژه‌ها [English]

  • фарњангнависї
  • забони форсї
  • тањаввул ва таљаддуд